प्रधानाचार्य का संदेश

  प्रधान डेस्क से

 

बच्चे उर्वरभूमि पर लहलहाती फसलों के सदृश हैं, जिस पर किसी भी राष्ट् की आधारशिला निर्धारित होती हैं। राष्ट्र् के भविष्य की बुनियाद बच्चें होते हैं। ये उस राष्ट्र्‌रुपी वृक्ष की जडें हैं जो नइ पीढ़ी को कार्य, आराधना तथा विद्वता के फल प्रदान करता है। इन बच्चों को भविष्य की लम्बी राह तय करनी है तथा राष्ट्र् को सफलता के मार्ग पर ले जाना है।


राष्ट्र की एकता अखण्डता को अक्षुण्ण तथा निरन्तर बनाये रखने का मूल आधार हमारे बच्चे ही हैं | जिंदगी के मैदान में विकसित होने वाले यही नन्हें पौधे भविष्य में राष्ट्र की फसल का रूप ग्रहण करेंगे | राष्ट्र के मजबूत एवं सुदृढ़ भविष्य का आधार इन्हीं नन्हें बच्चों के कंधों पर टिका है | राष्ट्र रूपी मजबूत पेड़ को जीवन रस प्रदान करने वाली जड़ें, ये बच्चे ही हैं, जिनके गहन परिश्रम, समर्पण एवं बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णयों का फल आने वाली पीढ़ियों को मिलता है | बच्चों को अपने स्वर्णिम भविष्य का एक लम्बा सफर तय करना है और इस रास्ते को तय करने में उन्हें राष्ट्र की प्रगति में कदम से कदम मिलाकर चलना होगा | राष्ट्र के भविष्य को सुनहरा आकार प्रदान करने में प्राथमिक तौर पर जिन लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण है, उनमें माता, पिता एवं शिक्षक प्रमुख हैं | इन सब में भी शिक्षक की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि उन्होंने इसके लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर स्वयं को स्वैच्छिक रूप से राष्ट्र सेवा हेतु समर्पित किया है | इसलिए शिक्षक से यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपनी योग्यताओं का सर्वोत्तम राष्ट्र एवं समाज को समर्पित करे | विद्यार्थी अभिभावक एवं समाज के लोग शिक्षक पर निस्वार्थ एवं गहरा विश्वास जताते हैं जिससे उऋण होने के लिए अपने कर्तव्य को गहन निष्ठा एवं ईमानदारी से पूरा किया जाना अनिवार्य है | समाज में एक आदर्श होने के नाते शिक्षक के लिए यह सदैव अनिवार्य है कि वह अपने विद्यार्थियों की मंगलकामना एवं उनके कल्याण में अपनी ऊर्जा लगाये |
श्रीमती सबिरा शोरी(प्राचार्य)